मैने सोचा की अपने लिये शाकाहारी खाने के लिये होटल मे बने रेस्टोरेंट से पुछना ही बेहतर होगा. अतः मैने क्रिस्टीना से कहा की तुम हाथ मुंह धोकर तैयार होओ, तब तक मैं नीचे रिसेप्शन से खाने के बारे जानकारी लेकर आता हूं. उसके हामी भरने के बाद मैने रिसेप्शनलिस्ट से डीनर के बारे में पुछा तो उसना सजेस्ट किया की अभी शाम तो साढे सात बजे नजदीक से ही एक क्रुज डिनर के लिये रवाना होगा. क्रुज पर बेहतरीन बेली डांस भी होगा, और आपको अपनी शाम को यादगार बनाने के लिये इस्तांबुल की नाईट लाइफ का आनंद लेना
ही चाहिये.
यह सुनकर मैं अपने रुम की और दौडा, और क्रिस्टीना से पुछा की उसकी क्या वह डीनर के लिये, क्रुज पर चलना पसंद करेगी. वह भी होटल से बाहर निकलकर ताजी हवा खाकर थोडा फ्रेश महसुस करना चाहती थी, अतः उसने भी तत्काल हां कर दी. हालांकी पहले मेरा मुड तो होटल मे ही खाना खाकर, फिर चुदाई समारोह शुरु करने का था, क्योंकि विमान मे जो चुदाई का आनंद लिया था, वह अलग किस्म का था. उसमे एक प्रकार का भय भी शामिल था. लेकिन अब बिलकुल निश्चिंत होकर कमरे में ही रात भर मजे लेने का विचार था. किन्तु बेली डांस का नाम सुनकर मेरी भी इच्छा जागृत हो गयी कि, थोडी देर बाहर समन्दर की ताजी हवा में आउटींग हो जायेगी, और डिनर भी हो जायेगा.
हालांकी एक बार मैने बेली डांस, काहिरा मे नील नदी पर एक क्रुज डीनर के दौरान ही देखा था. वह एक यादगार डिनर था. अतः सोचा की अभी तो शाम ही हुई है, चुदाई के लिये तो अभी रात भर बाकी है. कुछ देर बाहर जाकर खाना खाकर फिर लौट्कर चुदाई समारोह शुरु कर देंगे.
हम दोनो तैयार होकर पास ही समुद्र पर लगी एक शिप पर चढ गये, थोडी ही देर मे और भी सैलानी एकत्रित हो गये और फिर निर्धारित समय पर वह रवाना हो गया. इस्तान्बुल शहर के दोनो और बसे दो अलग अलग समुद्रों को मिलाने वाळी लगभग 31 किलोमिटर लम्बी स्ट्रेच जिसे बास्फोरस के नाम से भी जाना जाता है, पर हमारा शिप रवाना हुआ. इसकी चौढाई किसी बडी नदी के पाट से भी बहुत ज्यादा होगी. उसके दोनो और बसा हुआ इस्तांबुल शहर, शाम के वक्त बत्तियो में बहुत ही खुबसुरत लग रहा था. उसके दोनो ओर किनारों पर बसे खुबसुरत भवन इस्तान्बुल की शान में कशीदा काढ रहे थे. इस स्ट्रेच के एक ओर का हिस्सा युरोप मे था और दुसरी ओर का हिस्सा एशिया में, जो अनेकों जगह से पुलों द्वारा आपस में जुडा हुआ था.
शिप के डेक पर वेटर दौड दौड कर लजीज भोजन परोस रहे थे, कि तभी साजिन्दो के साथ खुबसुरत डांसरो ने प्रवेश किया. फिर शुरु हुआ इन्द्र्सभा को मात देने वाली अप्साराओं का मादक नृत्य. ठंडी हवाओ से बचाव के लिये चारों ओर शीशे की छत और दीवाल बनी थी.
मै आपकी जानकारी के लिये बतला दुं कि, बेली डांस अरब जगत का बहुत पुराना डांस है, जिसे अरेबिक डांस कहा भी जाता है. यह एशिया एवम अफ्रिका में फेले अनेकों अरबी देशों में प्राचीन काल से ही बहुत ही प्रसिद्ध है. इस डांस मे शरीर के सभी अंगो को उपयोग मे लाया जाता है, विशेषकर कमर के हिस्से को, इसीलिये इसे पश्चिमी जगत मे बेली डांस के नाम से जाना जाता है. यह कह दें की कमर के साथ नर्तकी की गांड भी उत्तेजक मुद्रा में मटकती है, तो गलत नही होगा. शायद आपको याद होगा अभिषेक बच्चन व ऐश्वर्या राय की
फिल्म "गुरु" जिसके शुरु मे मैय्या - मैय्या वाला गाना, वह एक बेली डांस ही था.
इसी प्रकार तुर्की का एक और "सुफी - दरवेश डांस" भी विश्व प्रसिद्ध है, जिसमे सुफी लोग गोल - गोल घुमकर डांस करते हैं. इस के भी इस्तन्बुल मे शो भी होते रहते हैं. शायद आपको बहुचर्चित फिल्म जोधा - अकबर का गाना - "ख्वाजा मेरे ख्वाजा, मेरे दिल मे समा जा" याद होगा. वह भी तुर्की का सुफी - दरवेश डांस ही था.
खेर पता नही आप भी मेरे बारे में क्या सोचते होंगे कि क्यों मैं बार बार विषय से भटक जाता हूं. ऐसा लगता है कि मुझे किसी युनिवर्सिटी मे भुगोल - इतिहास का प्रोफेसर होना था. इसके बजाय मैं नसीब का मारा, इन्जिनीयर बनने के बाद भी किसी एयर कंडीशंड आफिस में 9 से 5 बैठने के बजाय दुनिया भर मे दर दर भटकता फिर रहा हूं.
खेर मैने केबरे, स्ट्रीप, डिस्को, सम्बा, सालसा जैसे अनेको तरह के डांस देखे है, पर बेली डांस की बात कुछ ओर ही है. क्रिस्टीना मेरे से सटकर बैठी खाना खा रही थी, की तभी एक डांसर हमारे पास मे आई और हमे हाथ पकडकर डांस फ्लोर पर ले गयी. फिर क्या था, हम लोग भी उनकी स्टेप्स की नकल कर, डांस करने लगे. फिर क्रिस्टीना मेरे से चिपक कर डांस करने लगी. उसके उन्न्त वक्ष मेरे सीने से लगकर मेरे लिंगराज की आग को भडकाने लगे. मैं तो उसका दीवाना हो गया. मैने भी उसे अपनी बाहों मे भींच लिया, और डांस करने लगा. अब मै मौका देखकर उसके अंग प्रत्यंग पर हाथ फिराकर उसे उत्तेजित करने की कोशिश लगा.
थोडी ही देर में हम थककर अपनी सीट पर आ बैठे. अब मेरा मन खाना खाने में नही बल्की क्रिस्टीना को खाने का होने लग गया. मैने टेबल के निचे से हाथ उसकी जांघो पर फिराने लगा. वह भी गर्म होने लगी वह भी मौका देखकर अपना हाथ मेरे लिंग महाराज पर फिराने लग गयी. फिर हम दोनो पर मदहोशी छाने लग गयी. अभी तो क्रुज पर डांस व डीनर खत्म होने मे करीब दो घंटे बाकी थे, और हमारा स्टीमर तो किनारे से बहुत दुर निकल आया था. और यहां तो यह हालत थी की हम दोनो ही बेकाबु होने लग गये. अब लगा की क्रुज पर डिनर के लिये आने का निर्णय बहुत ही गलत था, इससे तो अच्छा होता की वहीं होटल मे रुक कर चुदाई का आनंद लेते, लेकिन अब पछताने से क्या होता.
वैसे भी आज क्रिस्टीना गजब ढा रही थी. उसने काले रंग की जीन्स और टी-शर्ट पहनी थी, उस पर भी मेच करता हुआ, एक काले रंग की स्कीवी, और गले में काले रंग का स्कार्फ. उसके गौरे जिस्म पर काला रंग तो बेहद जंच रहा था. वैसे भी इन गौरी चमडी वाली इन युरोपियन बालाओं का फेवरेट कलर काला ही होता है.
जिन पाठकों ने इस आत्म कथा का पिछला भाग नहीं पढा हो तो उन लोगों के लिये मैं क्रिस्टिना के शरीर का वर्णन दुबारा कर दूं. वह इतनी खुबसुरत थी जैसे कोई माडल हो, उम्र लगभग तीस वर्ष एकदम संगमरमरी गौरी चमडी, जैसे नाखुन गढा दो तो खुन टपक जायेगा, ब्लांड (सर पर गोल्डन कलर के लम्बे बाल), अप्सराओ जैसा अत्यन्त खुबसुरत चेहरा, बडी बडी नीली आंखे, इनमे डुबने को दिल चाहे, तीखी नाक, धनुषाकार सुर्ख गुलाबी रंगत लिये हुए औंठ, अत्यन्त मनमोहक मुस्कान जो सामने वाले को गुलाम बना दे, लम्बाई लगभग पांच फीट छह इंच, टाईट जींस को पीछे से उसकी गांड देखने पर, उसकी चुत छोड्कर गांड मारने की इच्छा जागृत हो जाये. ओह क्षमा करे मै, खास बात तो बताना ही भुल गया की उसके उन्नत स्तन ३४, कमर २६ और गांड ३६ ईंची थे. इन सब बातो का सारांश यह निकलता था कि उसे पहली बार देखने पर किसी भी साधु सन्यासी का लंड भी दनदनाता हुआ खडा होकर फुंफकारे मारने लगे. सोने पर सुहागा यह की वह एक शानदार जिस्म की मालिक होने के साथ साथ इटेलिजेंट भी थी, क्योंकी उसका जनरल नालेज भी बहुत अच्छा था.
अब मेरे लगातार हाथ फेरने से क्रिस्टीना गर्म होने लग गयी, फिर उसने धीरे से मेरे कान मे कहा कि, सुबह तो एयरोप्लेन मे जमीन से 35,000 फुट की ऊंचाई पर जन्नत के मजे दिला दिये, अब तुम यहां पानी पर चलते हुए शिप मे कुछ करो तो मैं तुम्हें कुछ जानं. यह सुनकर मैं चहुंका और मेरे दिमाग की घंटीयां हिल गयी. मैने उससे कहा की मैं देखकर आता हुं कि इन परिस्थितीयों में मैं क्या कुछ कर सकता हूं.
मै अपनी सीट से उठा, और सबसे पहले टायलेट की और भागा, कि कहीं शायद दुबारा टायलेट पोलो खेलने का एक मौका मिल जाये. लेकीन चुंकी शीप बहुत बडा नही था अतः उसमे मात्र दो ही टायलेट था. लगभग यात्री भी 75 से अधिक ही थे, अतः कोई ना कोई वहां आ जा रहा था. फिर खाने खाने व शराब पीने के बाद लगभग सभी को पेशाब के लिये, कम से कम एक बार तो आना ही था, अतः टायलेट पोलो खेलने का चांस मिलने की संभावना बिलकुल भी नही थी. मैने पुरे डेक पर घुम फिर कर देखा की कहीं कोई कमरा हो, पर कहीं कुछ नही था.
अब मैं निराश होकर लौट ही रहा था कि, तभी मेरी निगाह उपर की तरफ शीप के केप्टन की और गयी, देखा कि वह सफेद झक से कपडे में व्हील हाथ में लिये अपने कांच के केबिन मे खडा है. मैने आशा भर नजरों से उसकी ओर देखा और फिर उपर जाने के लिये सीढी पर चढा, पास पहुंचने पर उसने पुछा की, मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूं. तो मैने उसे बताया कि मेरी दोस्त की तबीयत अचानक खराब हो गयी है, और उसे चक्कर आ रहे हैं. वह थोडी देर लेटना चाहती है, क्या आपके पास कोई रुम है जहां वह थोडी देर आराम कर सके. कुछ क्षण सोचकर उसने कहा कि हमें किनारे पर पहुंचने में अभी करीब दो घंटे लगेंगे, तब तक आप चाहें तो लोवर डेक पर बने एक कमरे में जा सकते हैं वहां एक छोटा सा पलंग और एक टेबल कुर्सी लगी है उसमे रात को शिप का चौकीदार रहता है, लेकिन वह भी हमारे के किनारे पर पहुंचने पर आयेगा, तब तक वह रुम खाली ही है. आप चाहें तो उस रुम की चाभी ले जा सकते है.
अंधे को क्या चाहिये - दो आंखे. मैने उसे धन्यवाद बोला और चाभी लेकर तत्काल क्रिस्टीना के पास आया. उसका हाथ पकडकर आहिस्ता से उसे नीचे की तरफ बने बने कमरे में ले गया. कमरा हालांकी छोटा मगर साफ सुथरा था. उस पर लगा पलंग भी बडा नही था, मगर चुदाई के लिये पर्याप्त था. कमरे मे घुसते ही सबसे पहले मैनें दरवाजा बंदकर खिडकी के पर्दे लगा दिये. यह हालांकी यह कमरा बहुत एक तरफ था, और उस ओर किसी के भी आने की सम्भावना नही थी.
क्रिस्टीना अभी भी दरवाजे के पास खडी मुस्करा रही थी, उसे विश्वास नही हो रहा था कि मैं उसकी इच्छा पुरी करने में सफल हो रहा हूं. अब मैंने उसे अपनी गोद मे उठाया और पलंग पर बैठ गया, वह मेरी गोद में ही लेटी हुई थी. मैने उसका लम्बा सा चुम्मा लिया, उसकी सांसों मे एक मादकता की महक थी, उसके रसीले होठों मे एक इस दुनिया जहान को भुलाना वाला जादु था. जब वह मुझसे चिपक रही थी तो मेरे सीने मे दो दहकते हुए अंगारे से चुभने लगे. ऐसा लग रहा था कि उसके दोनों वक्ष, दो गर्म भट्टीयों मे तब्दील हो चुके है, और यह गर्माहट मुझे जलाकर भस्म कर देगी. हम दोनो अपने बस मे नही थे. दोनो एक दुसरे के शरीर को टटोलने लगे. कामुकता अपनी सीमा को लांघ चुकी थी.
आज सुबह हवाई जहाज मे चुदाई करते समय हम दोनो ने कोई भी आवाज नही निकालकर, जो चुदाई की थी, उस संयम का बांध अब टुट चुका था. हम दोनों नीडर होकर आवाजें निकाल रहे थी, क्योंकि हम डेक से काफी दुर थे जहां पार्टी चल रही थी. इसके अलावा शीप के इन्जीन के शोर के साथ-साथ पानी के कटने की आवाज मे हमारी मदभरी आवाजे तो उस कमरे से बाहर जा नहीं सकती थी. अब मैने जैसे ही क्रिस्टीना की गर्दन पर अपनी जीभ फिराने लगा तो, वह तडपने लगी. उसके बाद जैसे ही मैने उसके कान की लोम अपने मुंह मे ली, वह अपने काबु में नही रही. उसने मेरे जींस को खोलकर उसमे से मेरे लिंग महाराज को आजाद कर दिया, और उसे सहलाने लगी. मैने भी उसका स्कीवी, टी-शर्ट और फिर जींस भी निकाल दी, अब वह मेरे सामने काले कलर की ब्रा और पेंटी मे जन्नत की हूर लग रही थी.
लेटेस्ट स्टाइल की ब्रा मे उसके झांकते हुए 34 इन्ची वक्ष का उपरी भाग, जो किसी पहाडों की चोटीयों जैसा लग रहा था. यह नजारा तो किसी भी साधु सन्यासी की नियत खराब करने के लिये काफी थे, तो फिर मुझ जैसे इंसान की क्या बिसात थी. इधर क्रिस्टीना ने भी आवेश मे आकर मुझे भी बिलकुल नंगा कर दिया. अब हम पागलों की तरह एक दुसरे के शरीर के अंग प्रत्यंग को मसलने मे लगे थे. देखने में ऐसा लग रहा था, की हम दोनों कुश्ती लड रहे हों. बिल्कुल सही, वह बेड रेसलिंग ही तो थी. दुनिया का एक मात्र गेम, जिसमें दोनो खिलाडी ही जीतते हैं. यदि कोई हार जीत होती भी है तो, हारने वाला हारकर भी बहुत खुश होता है.
फिर मुझसे रहा नही गया, और मैने उसकी प्यारी सी रेशमी ब्रा के हुक खोल दिये, तो वह झटके से बहुत दुर जाकर गिरी. उसके दुधिया रंगत लिये हुए बेहद टाईट वक्ष ऐसे लग रहे थे, जैसे कोई दो गहरी घाटीया हों. जैसे ही मैने अपनी जीभ उसके एक वक्ष के दुध की टोंटी पर फिराई तो वह तो जोर जोर से सीत्कार कर कामोत्तेजक आवाजें निकालने लगी. उसने मेरा लंड पकड लिया, और उसे पर हाथ फिराने लगी. मैं पागलों की तरह कभी बांया स्तन तो कभी दायां स्तन अपने मुंह मे लेने लगा.
मेरे ख्याल से जवान औरत का स्तन दुनिया का सबसे मीठा फल होता है. सारी दुनिया भले ही आम को फलों का राजा मानती है, लेकिन मेरी राय से तो आप सब भी सहमत होंगे एक उन्नत स्तन के मुकाबले मे बेचारे उस हापुस आम की क्या बिसात. अब मैं इसके वक्ष रुपी फल का रसास्वादन करने लगा.
मुझे लग रहा था कि, दुनिया मेरे मुंह में समा गयी है. अब क्रिस्टीना भी कुछ अपने मुंह मे लेना चाहती थी. वह थोडी देर बाद वह नीचे खिसक गयी और मेरा लंड मुंह में लेकर से चुसने लगी. फिर कुछ देर बाद मैने भी पलटी खाते हुए 69 की पोजीशन बनाते हुए, उसकी पेंटी निकाल दी और उसकी रसीली मुलायम झांटदार चुत का रसास्वादन करने लगा. में अपनी जबान उसकी नर्म और गर्म चुत मे अंदर बाहर कर, उसे चुदाई का अहसास देने लगा. कुछ देर तक अनवरत जीभ-चोदन करने के बाद मुझे अपने मुंह मे कुछ गर्म लिक्विड का स्वाद आया अहसास हुआ, और फिर क्रिस्टीना कांपती हुई ठंडी पड गयी. मै समझ गया की वह झड गयी है.
लेकिन मैंने अपने जीभ-चोदन के प्रोग्राम को नही रोका, तो नतीजे मे कुछ देर में ही वह दुबारा गर्म हो गयी. अब मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और मै उसके उपर आ गया, फिर मैने अपने लंड उसकी चुत मे प्रवेश करा दिया. उस क्षण को मै शब्दो में बयान नही कर सकता. शायद समय शायद स्वयं भगवान भी मेरे सामने आकर खडे हो जाते तो, मैं उनसे भी कह देता कि, "हे भगवान जी, अभी तो मुझे क्षमा करें. कृपया थोडी देर के लिये तो आप चले ही जायें. कोई वरदान वगैरह भी देने की इच्छा हो तो, कृपया थोडी देर बाद फिर से आ जाना". अब मैने बहुत ही आहिस्ता से अपने लंड को उसकी चुत मे अंदर बाहर करना शुरू किया, तो क्रिस्टीना जोर जोर सी आवाजे निकालने लग गयी. वह मेरी गांड को पकडकर उपर नीचे कर मुझे सहयोग करने लग गयी. हम दोनों पर नशा चढता ही जा रहा था. कुछ देर की चुदाई के बाद मुझे लगा की अब कुछ स्ट्रोक और मारे तो मेरा लंड पानी छोड देगा, तो फिर मैने उसे रुकने का इशारा किरा, और उसका स्तन मर्दन करने लगा, ताकी मेरा फाल्ट नही हो जाये. वह समझ गयी और मुझसे बोली की पोजीशन बदल लेते है.
अब वह पीछे से मेरा लंड लेना चाहती थी, वह पलंग पर उल्टी लेट गयी. मैनें उसके पेट के नीचे तकीया रख दिया, और फिर पीछे से उसकी प्यारी सी मखमली चुत मे अपने लंड को प्रवेश करा कर थोडी देर रुक गया. अब मैं अपनी जबान से उसकी पीठ, गर्दन का पिछला भाग चाटने लगा, वह कामोत्तेजक आवाजें निकालने लगी. कुछ देर बाद मैंने, उसकी चुत मे अपने लंड को जितना अंदर डाल सकता था, प्रविष्ट करा दिया. वह बिस्तर पर उल्टी लेटी रही पर मैं उसकी गांड पर बैठ गया, जैसे की मै किसी घोडी की सवारी कर रहा हूं. थोडा सा आगे झुककर, मैनें अपने दोनो हाथों के पंजो से उसकी गांड को हौले हौले से दबाने लगा. जैसे की रोटी बनाते वक्त आटा गुंथते समय पानी मिले आटे को मुक्के से अंदर तक दबाया जाकर, फिर छोड दिया जाता है, और फिर अगले ही क्षण दुबारा से हल्के हाथ का प्रेशर बनाकर दबाया जाता है. इसमे क्रिस्टीना को वही अहसास
मिला जो, लंड को चुत में अंदर बाहर करते हुए मिलता है.
जैसे जैसे मैं उसकी गांड को दबाने लगा, वैसे वैसे वह तडपने लगी. वह भी मदमस्त होकर अपनी गांड को झटके देने लगी. उसे पुर्ण चुदाई का अहसास मिल रहा था. अंत मे वह क्षण आ ही गया की वह एक बार फिर से झड गयी. लेकिन मेरा फाल्ट अब भी नही हुआ था, क्योंकी इस गांड दबाऊ आसन मे मर्द का स्टेमीना बहुत बढ जाता है, और वह सामान्य आसनों के मुकाबले मे कही ज्यादा देर तक अपनी महीला साथी को चोद सकता है. वही मेरे साथ भी हुआ, मैं अब भी लंड की पिचकारी छोडने के लिये भरा पडा था.
चुदाई करते वक्त क्रिस्टीना जो आवाजें निकाल रही थीं, उससे यह साबित हो रहा था कि, औरत चाहे दुनिया के किसी भी देश की हो, किसी भी रंग की हो, चाहे उसकी मातृ भाषा कुछ भी हो, लेकिन चुदवाते समय वह एक ही भाषा बोलती है. चुदाई की अपनी एक अलग ही भाषा होती है, जो सारी दुनिया मे एक जैसे ही बोली जाती है.
अब मैंने क्रिस्टीना को सीधा कमर के बल लेटाया और फिर और उसकी दोनों टांगो को उसकी कमर की ओर मोड कर उसकी चुत मे अपने लंड को आहिस्ता से अंदर डाल दिया. यह आसन सबसे आसान और ज्यादा प्रचलित भी है. अब जब मुझे लगा की मेरा लंड उसकी चुत मे पुरी तरह से अंदर चला गया है, तो कुछ देर रुककर मैंने अपने शरीर को बिना हिलाये, और लंड की नसों को फुलाना शुरु किया, इससे उसकी चुत मे झटके लगते और उस पर मस्ती छाने लगी, तो बदले मे वह भी अपनी चुत की नसें हुलाकर जवाब देने लगी. यह भी एक अलग प्रकार का आनंद था. हम दोनो रुक रुक कर अपने लंड और चुत की नसों को बारी बारी से फुलाते रहे.
इस प्रकार लंड और चुत के बारी बारी से फडकने के कारण एक परमानंद का अनुभव होने लगा. इसके साथ मैं क्रिस्टीना के स्तनो का भी मर्दन कर रहा था. लगभग 10 मिनट तक इस खेल को खेलने के बाद जब मेरा ध्यान घडी की और गया तो देखा की हमें इस रुम में आये एक घंटा हो चुका था, तो मुझे लगा की अब डेक पर
हमें लौट जाना चाहिये क्योंकि जहाज के केप्टन को तो पता थी की हम रुम मैं ही हैं. हो सकता है कि वह हमारी कुशल क्षेम पुछने के लिये नीचे स्वयं आ जाये या अपने किसी सहयोगी को ही भेज देवे. यह सोचकर मैने अपने लंड को अंदर बाहर करना शुरु कर दिया.
जैसे ही मैंने फाल्ट करने का मूड बनाया, तो अगले दो - तीन मिनट में ही मेरे साथ साथ क्रिस्टिना का भी फाल्ट हो गया. इस फाल्ट का दिमाग से बहुत बडा सम्बंध है, यदि आप दिमाग में सोच लेते है कि आप लम्बी चुदाई करेंगे तो वह आपका फाल्ट लम्बे समय तक नही होगा. लेकिन जैसे ही आपने अपने दिमाग को काम तमाम करने के संकेत दिये तो लंड भी पिचकारी छोडने मे क्षणीक भी देरी नही करता है.
अब हम दोनों एक दुसरे की बाहों मे निस्तेज होकर दो मिनट तक पडे रहे. फिर मैंने एक अच्छे काम क्रीडा का खिलाडी होने का रोल निभाते हुए, अगले कुछ मिनट तक उसके शरीर को नार्मल करने के लिये हाथ फेरता रहा. इस दौरान मैं उसके स्तनों को भी आहिस्ता से मसलता रहा. अब धीरे धीरे उसकी उत्तेजना शांत पडने लगी. इतने में मेरा लंड भी सामान्य अवस्था में आकर उसकी चुत से अपने आप बाहर आ गया.
फिर हम उठे, अपने अपने कपडे पहने, और केप्टन को धन्यवाद देकर रुम की चाभी लौटाकर डेक पर चल रही पार्टी मे शामिल हो गये. डान्सर्स अब भी बेली डांस कर रही थीं. हमारा जहाज अब अपने गंतव्य स्थल की ओर वापिस लौटने लगा था. करीब एक घंटे की चुदाई के बाद हम दोनों को भुख लगने लगी थी, अतं हमने भर पेट खाना खाया. क्रिस्टीना बहुत खुश थी, उसने बताया की ऐसा अभुतपुर्व आनंद उसने कभी नही उठाया था. सुबह हवाई जहाज मे जमीन से करीब 35,000 फीट की ऊंचाई पर चुदाई और शाम को पानी के जहाज भी. उसका कहना था, कि यह दिन वह कभी भी नहीं भुल सकती है. खेर मैं भी इस दिन को कैसे भुल पाऊंगा.
सच बात तो यह थी की पार्टनर मंजा हुआ खिलाडी तो चुदाई के खेल का मजा अलग ही आता है. रात के साढे ग्यारह बजे तक हम अपने होटल के कमरे में लौट आए थें. हम दोनो थक चुके थे, अतः एक दुसरे से चिपक कर सो गये.
फिर अगले दिन सुबह सात बजे नींद खुली, उठ कर तैयार होकर हमने नीचे जाकर होटल के रेस्टोरेंट में जाकर नाश्ता किया, और फिर एक चुदाई का मजेदार राऊंड निपटाया, सामने खिडकी खुली थी, समन्दर की लहरे देखने को मिल रही, यहां दिल के साथ साथ लंड और चुत भी हिलोरें ले रहा थें. जब सवेरे के नाश्ते की चुदाई हो गयी तो हम दोनों ने विचार किया की, क्यों ना, नजदीक मे ही स्थित विश्वप्रसिद्ध तुर्की सभ्यता की कुछ महान इमारतो के दर्शन कर लिये जायें. क्रिस्टीना ने भी तत्काल हां कर दी क्योंकी वह भी मेरी ही तरह इस्तांबुल पहली ही बार आई थी.
अब हम अपनी होटल के बिलकुल ही नजदीक मे स्थित सोफिया हेगिया, हिप्पोड्रोम, ब्लु मस्जिद, टोपकापी पेलेस, इजिप्शियन बाजार, सुलेमान मस्जिद जैसी विश्व प्रसिद्ध इमारतों को देखा. इनमे सभी एक से एक लाजवाब व पुरानी है. सोफिया हेगिया एक पांचवीं शताब्दी में बना हुआ एक चर्च था, जिसे पन्द्रहवी शताब्दी में आटोमान शासकों नें चर्च के चारों ओर चार मिनारें बनाकर एक मस्जीद मे बदल दिया गया था. फिर इसके साथ ही तुर्की मे पन्द्रह सो वर्ष पुराने क्रिश्चियन साम्राज्य का अंत होकर, मुस्लिम राज की शुरुआत हो गयी. सबसे प्रसिद्ध आटोमान शासक - सुल्तान मेहमेत उसी वंश का शासक था, जिस वंश का बाबर था, जिसने हिन्दुस्तान मे मुगल वंश की नींव डाली थी. प्रथम विश्व युद्ध के खात्मे के बाद सबसे अच्छी बात यह रही की, तुर्की मे राजवंश के खात्मे के बाद पहले राष्ट्रपति मुस्तफा कमाल अतातुर्क ने इस पन्द्रह सो वर्ष पुराने सोफिया हेगिया भवन को एक म्युजियम का रुप देकर एक विवाद को खत्म कर दिया. कारण यह भव्य इमारत बाहर से तो एक मस्जिद दिखती है, लेकिन अंदर से इसमे दीवारों व छत पर बनी बहुत बडी बडी और भव्य क्रिश्चियन धर्म की मोजेक पेंटींग्स इसके एक चर्च होने की चुगली करती थी. मुस्तफा अतातुर्क का तुर्की में वही सन्मान है हो हिन्दुस्तान में महात्मा गांधी का है. भगवान हिन्दुस्तान के नेताओं को भी ऐसी ही सदबुद्धी दे. खेर मे फिर बहकने लगा. कुल मिलाकर हमारा दिन बढा शानदार गुजरा. अब थोडी थकान होने लगी थी, तो शाम होने से पहले ही लौट होटल लौट आये.
हालांकी हम दोनों की इस्तांबुल के प्रसिद्ध सार्वजनिक स्नानागार, जिन्हे "हमाम" कहा जाता है, में नहाने की इच्छा ठंड के कारण अधुरी रह गयी, और वैसे भी समय की कमी भी थी. सोचा फिर कभी मौका मिला तो देखेंगे.
कमरे में क्रिस्टीना ने दिल्ली से खरीदी कामशास्त्र की किताब के बारे में याद दिलाया. फिर उसमें से पेंटींग्स को देखकर, हमने विभीन्न आसनों को ट्राय कर रात भर चुदाई का मजा लिया. मेरे वह क्रिस्टीना के साथ गुजारे दो
दिन, चुटकी बजाते ही हवा में उड गये. मुझे आज तक किसी भी महिला नें सेक्स का वह आनंद नहीं दिया जो क्रिस्टीना नें मुझे दिया था. मैं उस समय को कभी भी नहीं भुल सकता हूं. आज भी मैं उन्हे अपनी जिंदगी के सबसे बेहतरीन पल मानता हूं. उन दो दिनों में जैसे हमनें पुरी जिंदगी जी ली थी. उसके बाद मुझे साक्षात यमराज भी आकर कहते की अब तुम्हारा इस धरती पर जीवन समाप्त हो चला है, तो भी मुझे शायद गम नहीं होता, मैं बहुत खुशी से यमराज के साथ मृत्युलोक की ओर चला जाता.
अगले दिन सुबह हम दोनो एयर पोर्ट की ओर फिर मिलने के वादे के साथ चले. सुबह साढे दस बजे क्रिस्टीना पेरिस के लिये रवाना हो गयी, और उसके मात्र एक घंटे बाद ही मैं भी बर्लीन चला गया. मैं एयरपोर्ट पर क्रिस्टीना के उडने से पहले भगवान से यह प्रार्थना करता रहा की कहीं कुछ हो जाये, और उसकी फ्लाईट केंसल हो जाये, और हम कुछ समय और साथ रह जायें, लेकिन ऐसा कुछ नही हुआ, जैसे ही उसका विमान हवा में उडा, उसके बाद मुझे पता नहीं था कि, हम दुबारा कब मिलेंगे.
खेर क्रिस्टीना से मेरी दुबारा मुलाकात अगली गर्मीयों में पेरिस में ही हुई, जहां हमने बहुत मजे लिये. मैनें वहां उसके कहने पर उसके दोस्तों के लिये कामशास्त्र की क्लास ली. वह भी एक लम्बा किस्सा है. यदि आप लोगों को मेरी आत्म कथा का यह भाग पसंद आया हो तो कृपया मुझे vikky0099@gmail.com पर मेल करें ताकी में अपने पेरिस वाली कामशास्त्र की क्लास के किस्से सुनाने की हिम्मत जुटा सकुं. यदि आप हमारे साथ हिमालय वाली ट्रिप में जाने के इच्छुक हों तो मुझे लिखे, हमारे साथ कोई भी एक महिला एवं एक पुरुष जा सकता है.






















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